Rajasthan New CM : मुख्यमंत्री का नाम मोदी ने तय कर लिया ? घोषणा

Rajasthan New CM : मुख्यमंत्री का नाम मोदी ने तय कर लिया ? घोषणा !कौन बनेगा राजस्थान का मुख्यमंत्री?

  1. वसुंधरा राजे बाबा
  2. बालक नाथ योगी
  3. गजेन्द्र सिंह शेखावत
  4. अश्विनी वैष्णव
  5. दिया कुमारी

कौन बनेगा राजस्थान का मुख्यमंत्री? पांच चेहरे सामने चुना किसी एक को जाना है। दिल्ली में किस के नाम की पर्ची निकलती है? हर किसी के मन में टूक टुकी लगी हुई है। राजस्थान में बीजेपी ने 115 सीटें जीतकर यहाँ के रिवाज को कायम रखा है। रिवाज ये की हर 5 साल बाद राजस्थान में सरकार बदलती। लेकिन अब जनता में सवाल ये की मुख्यमंत्री कोण बनेगा ?

अब की बार इस रिवाज पर ताज किसके सिर सजेगा किसी के मन में यही सवाल है और इसी कड़ी में वसुंधरा राजे ने जयपुर में शक्ति प्रदर्शन कर दिया है। जिस तरह से वसुंधरा के आवास पर विधायक पहुँच रहे है। इससे ये भी माना जा रहा है की वसुंधरा राजे को कहीं एहसास तो नहीं हो गया है। इस बार पार्टी हाई कमान राजस्थान के लिए नया चेहरा ला रही है। ऐसे में खबर आ रही की वसुंधरा राजे ने 68 विधेयकों से बात की और 28 विधेयकों से मुलाकात की है !

Rajasthan New CM

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वसुंधरा राजे से मिलकर आने वाले विधायक कह रहे हैं कि वंसुधरा ही मुख्यमंत्री के लिए सबसे लोकप्रिय चेहरा है व उन्होंने पिछले कार्यकाल में अच काम भी किया है ! वंसुधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकीं पहली बार 2003 से 2008 तक, दूसरी दफा 2013 से 2018 तक। लेकिन 2018 में बीजेपी की हार के बाद कहा जाने लगा कि पार्टी ने वसुंधरा राजे को किनारे कर दिया है लेकिन इस बार वो फिर से सीन में और अपनी ताकत दिखा रही है।

लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजे पार्टी हाई कमान ने गजेंद्र सिंह शेखावत और बाबा बालक नाथ योगी को तत्काल दिल्ली बुलाया, जिसके साथ अटकलें की शुरू हो गयी। गजेन्द्रसिंह शेखावत और बालक नाथ योगी में से कोई एक CM सकता है, । CM सस्पेंस के बीच सियासी गलियारों में चर्चा ये भी है कि पार्टी के ऊपरी स्तर पर मुख्यमंत्री के नाम पर चयन हो चुका है। अब विधायक दल की बैठक के बाद इस नाम पर घोषणा हो सकती है। ऐसे में पार्टी के कई नेता दावा कर रहे हैं की केंद्रीय नेतृत्व से चौंकाने वाला फैसला हो सकता है।

राजस्थान BJP अध्यक्ष अरुण सिंह ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यमंत्री के संबंध में पार्टी के संसदीय बोर्ड का फैसला सभी को मानना होगा। उधर वंसुधरा राजे के समर्थक विधायक कहते हैं कि केंद्र सात सांसदों ने चुनाव लड़ा था, तीन चुनाव हार गए और इन्हें तो केंद्र ने ही मैदान में उतारा था। वो कहते हैं कि पूरे चुनाव में वसुंधरा ने 60 जनसभाएं की। बीजेपी के तमाम बागी नेताओं के खिलाफ़ कोई भी जन सभा और प्रचार नहीं किया। वे कहते हैं कि नतीजों की समीक्षा कीजियेगा। तो कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सही बात ये है की वसुंधरा के मुकाबले बीजेपी के पास राजस्थान में कोई लोकप्रिय नेता नहीं। माना जा रहा है कि इससे वसुंधरा राजे बखूबी समझते भी हैं। हालांकि वो पूरा प्रेशर टैक्टिक्स में अपना रही है और एक प्रेशर पॉलिटिक्स के तौर पर उनके विधायक से मिलना मिलने को देखा जा रहा है और इसके बाद आलाकमान क्या विवश होगा? यह इसके चैलेंज समझेगा ही तो देखने वाली बात होगी !

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